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हमारे बारे में

श्री रामचंद्र वैद्य आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के संस्थापक सचिव श्री विजय कुमार मिश्रा जी तथा मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीमती संध्या मिश्रा जी हैं। संस्थापक सचिव श्री विजय कुमार मिश्रा जी के परम पूज्य दादाजी स्वर्गीय श्री रामचंद्र वैद्य जी एक प्रसिद्ध एवं प्रतिष्ठित वैद्य थे। वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रथम बैच के विद्यार्थियों में से एक थे। उन्होंने गाज़ीपुर में रहकर अपनी समर्पित चिकित्सा सेवा के माध्यम से समाज के व्यापक जनकल्याण का कार्य किया और आयुर्वेद की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया।

स्वर्गीय श्री रामचंद्र वैद्य जी का एक सपना था कि आयुर्वेद चिकित्सा, जो समय के साथ धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है, उसके संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के लिए एक उच्च स्तरीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय की स्थापना की जाए। इसी महान उद्देश्य तथा उनके सपनों को साकार करने के लिए वर्ष 2014 में उनके पावन नाम पर श्री रामचंद्र वैद्य आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय की स्थापना की गई। इस संस्थान का प्रमुख उद्देश्य यह है कि यहाँ से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएँ उत्कृष्ट ज्ञान, नैतिक मूल्यों और व्यावहारिक दक्षता से संपन्न होकर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित वैद्य बनें। इस महाविद्यालय में अनुभवी एवं योग्य शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण तथा व्यावहारिक शिक्षा प्रदान की जाती है।

महाविद्यालय को भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) से मान्यता प्राप्त है तथा यह महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर से संबद्ध है। अब तक यहाँ से तीन बैच सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हो चुके हैं। इस संस्थान के अनेक छात्र विश्वविद्यालय में शीर्ष स्थान प्राप्त कर चुके हैं और वर्तमान में समाज की सेवा में उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। साथ ही, कई छात्र-छात्राएँ चिकित्सा अधिकारी के पद पर चयनित हुए हैं तथा एम.डी./एम.एस. पाठ्यक्रमों के लिए विभिन्न सरकारी आयुर्वेदिक महाविद्यालयों में भी चयनित हुए हैं।

महाविद्यालय से संबद्ध 60 शैय्या (बेड) युक्त चिकित्सालय सभी आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित है। चिकित्सालय के बाह्य रोगी विभाग (OPD) में प्रतिदिन लगभग 125 से 140 रोगियों को परामर्श एवं उपचार प्रदान किया जाता है, जबकि आंतरिक रोगी विभाग (IPD) में सामान्यतः 25 से 35 रोगी भर्ती रहते हैं। यहाँ चिकित्सा से संबंधित विभिन्न रोगों की जाँच की समुचित सुविधाएँ उपलब्ध हैं तथा आधुनिक उपकरणों से युक्त प्रयोगशाला भी स्थापित है।

चिकित्सालय में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के अंतर्गत महिलाओं के लिए अल्ट्रासोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति की आवश्यक सेवाएँ भी प्रदान की जाती हैं। पंचकर्म विभाग में विभिन्न जटिल एवं दीर्घकालिक रोगों का उपचार संशोधन चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से किया जाता है। इसके अतिरिक्त, चिकित्सालय में गुदा रोगों के उपचार हेतु क्षारसूत्र विधि की सुविधा उपलब्ध है तथा सामान्य शल्य चिकित्सा से संबंधित ऑपरेशन की व्यवस्था भी है। बाल-रोग विभाग के अंतर्गत प्रत्येक माह पुष्य नक्षत्र के पावन अवसर पर बच्चों को स्वर्णप्राशन संस्कार की सुविधा प्रदान की जाती है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता, बुद्धि एवं समग्र विकास को प्रोत्साहन मिलता है। साथ ही, नवजात एवं बाल स्वास्थ्य संरक्षण, पोषण परामर्श तथा बच्चों की समग्र आयुर्वेदिक देखभाल की विशेष व्यवस्था भी उपलब्ध है।

स्वस्थवृत्त विभाग के अंतर्गत स्वास्थ्य संरक्षण एवं रोगों की रोकथाम के उद्देश्य से प्रतिदिन प्रातः एक घंटे का योग शिविर आयोजित किया जाता है, जिसके माध्यम से लोगों को योग, दिनचर्या तथा स्वस्थ जीवन शैली के प्रति जागरूक किया जाता है।

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